आख़िर एक इंसान हूँ मैं
इथियोपिया के विख्यात कवि ओसोलन मोसावा की कविता . रेत की नदी में चलते-चलते दुखने लगे हैं पाँव दूर है गाँव कहाँ से लायें ऐसी नज़र जो दिखाए एक पेड़ बिना पत्तों वाला ही सही कहाँ से लायें ऐसे कान जो सुनाएं एक गीत बिना भाव वाला ही सही कहाँ से लायें एक जुबान...
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बालकिशन
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[30 Aug 2008 04:20 AM]



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