कण-कण में भगवान नहीं, कण-कण में संघर्ष है

एक हिंदुस्तानी की डायरी सियाराम मय सब जग जानी, करहुं प्रणाम जोरि जुग पाणी। दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करो क्योंकि सृष्टि के कण-कण में राम हैं, भगवान हैं। अच्छा है। परीक्षा में प्रश्नपत्र खोलने से पहले बच्चे आंख मूंदकर गुरु या भगवान का नाम लेते हैं। अच्छा है। नए काम का श्रीगणेश... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल रघुराज
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[30 Aug 2008 00:58 AM]

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