आप कैसा इस्लाम या मुसलमान देखना चाहते हैं
प्रभात जी, मैं जानता हूँ आपने उकसाने के लिए ये टिप्पणी नहीं कर रहे। लेकिन जिस माहौल में हम रह रहे हैं, वहाँ आपका सवाल और फरीद का जवाब, ये बता रहा है कि हमारे समाज में कहीं कोई कड़ी टूट गयी या गायब हो गई है। हम अपने ही समाज को, वहाँ रहने वाले जीते-जा...
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Nasiruddin
Nasiruddin
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[23 Aug 2008 05:47 AM]



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