मिलिये समीर लाल जी के कवि गुरू से

हम बड़े नहीं होंगे, कॉमिक्‍स-जिंदाबाद सबसे पहले गुरू देव के सम्मान में उनकी कुछ कविताऐं - एक डाल से तू है लटका, दूजे पे मैं बैठ गया.. तू चमगादड़ मैं हूं उल्लू, गायें कोई गीत नया.. घाट-घाट का पानी पीकर, ऐसा हुआ खराब गला// जियो हजारों साल कहा पर, जियो शाम तक ही निकला.. ये कवि आहत कैसे लगे म... [पूरी पोस्ट]
writer PD
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[21 Aug 2008 23:54 PM]

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