गुनगुनाते हुए कुछ ही पल..
धूप भरी ज़िन्दगी में निर्झर में पैर डाले गुनगुनाते हुए कुछ ही पल एसे नहीं हैं क्या जैसे भूले हुए लम्हों में बीती हुई बातों की चीरफाड और छोटी छोटी बातों पर घंटों की उलझन जैसे आपस में गुथे हुए हम... फिर फिर याद आओगे आप हमें स्मृतियों में महकेंगे ये पल औ...
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राजीव रंजन प्रसाद
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[20 Aug 2008 01:17 AM]



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