एक पुरानी ग़ज़ल

kuch ehsaas बहुत दिनों से ब्लॉग से दूर थी....आज कुछ नया तो नहीं एक पुरानी ग़ज़ल ही पोस्ट कर रही हूँ!बहुत दिनों से कुछ नया नहीं लिखा!शायद एक दो दिन में कुछ नया लिखूं... जब से तकदीर कुछ खफा सी है जीस्त भी मिलती है गैरों की तरह शब के साथ ही गुम होते हैं वफ़ा करते हैं... [पूरी पोस्ट]
writer pallavi trivedi
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[19 Aug 2008 03:34 AM]

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