इस हसीं रात के दामन में....
शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने कभी शब-ऐ-बारात का नाम नहीं सुना होगा, इसकी वजह इसे बातचीत में इस्तेमाल होने वाले फिकरों में अकसर इस्तेमाल किया जाना रहा है. खुशियों भरे दिनों में अक्सर ये मिसाल दी जाती है, कि आजकल उनके दिन ईद और रातें शब-ऐ-बारात जैसी गुज़र...
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rakhshanda
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[19 Aug 2008 02:09 AM]



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