है राम के वजूद पे हिन्दुस्तां को नाज़

साझा-सरोकार है राम के वजूद पर हिन्दुस्तां को नाज़ अहले नज़र समझते हैं इसको ईमाम-हिंद तलवार का धनी था, शुजाअत में फ़र्द था पाकीज़गी में जोश, मुहब्बत में फ़र्द था। इकबाल की इक नज़्म से हम में से सारे लोग इस वितंडा से वाकिफ ज़रूर होंगे कि विभाजन में उर्दू शायर इकबाल क... [पूरी पोस्ट]
writer शहरोज़
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[18 Aug 2008 19:23 PM]

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