पीछे छोड़ आई थी, ‘वो’, मेरे लिए सब

POEM OF SOUL अकेली जिंदगी की उधेड़बुन, और दो जिंदगी को जोड़ने वाली फेरों के समय हाथों से बनी वो गांठ लगी चुन्नी। वो जो मेरे लिए सारी जिंदगियों को पीछे छोड़ आई थी सिर्फ एक जिंदगी के लिए। उसकी आंखें, लगी रांहों पर राहों में से निकलती एक राह, जिसका इंतजार तकती एक र... [पूरी पोस्ट]
writer Nitish Raj
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[12 Aug 2008 17:03 PM]

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