डॉ. भारती के 'अँधा युग' की भूमिका और अपनी बात

आज़ाद लब पहली वजह तो यही है है कि यह एक सर्वकालिक कंटेंट है. दूसरी बात इसका गीतात्मक होना. सबसे विशेष बात है मौके का चयन. यह युद्ध के १८वें दिन बाद की कथा है. मजे की बात यह है कि दुर्योधन और भीम के बीच जंघाफाड़ युद्ध अभी शेष है. दुर्योधन का मरना अभी नहीं हुआ... [पूरी पोस्ट]
writer विजयशंकर चतुर्वेदी
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[12 Aug 2008 13:38 PM]

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