मेरा गाँव मेरी आँखों से...
मेरी रूह यहाँ की मिट्टी में गूंदी नूर के बूंद सी है नदि के किनारे घने पेड़ों के साये ....... कहीं कमल भी खिले थे ..... किस्से कहानी नाव में सवार इसी किनारे से कई बार चले थे यूँ लगता है इन पेड़ों के पीछे वे साथी छिपे हैं जो बचपन की पगडंडियों में मिले...
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Beji
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[07 Aug 2008 06:06 AM]



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