LOVE STORY # 524: धूप थी, बारिश थी, इंद्रधनुष नहीं था
उसने सब कुछ उलट पलट डाला . कमरे का हर समान . अलमारी . बाहर का आंगन , दालान , धोबी का हिसाब और किताबों , सीडी और डीवीडी का रैक . अच्छा ये हुआ कि जो धूल वहां बहुत दिनों से जमा थी , वह अपनी जगह से हटकर कहीं और बैठ गई . उसने अपने अतीत के बारे में सोचा ....
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आस्तीन का अजगर
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[07 Aug 2008 01:47 AM]



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