जिगर की बात

भीगी गज़ल हमने छुपा के रखी थी सबसे जिगर की बात सुनते हैं फिर भी गैरों से, अपने ही घर की बात छोटी सी बात से ही तो बुनियाद हिल गयी मज़बूत हैं कहते रहे, दीवार ओ दर की बात बनना सफ़ेदपोश तो कालिख लगाना सीख उंगली उठाना बन गया अब तो हुनर की बात बातें फक़त बनाने में न... [पूरी पोस्ट]
writer श्रद्धा जैन
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[05 Aug 2008 10:23 AM]

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