मैं जिनके लिए लिखती हूँ, वो मुझ पर अपना थोड़ा तो वक्त बर्बाद करें
यह क्यूँ लिख रही हूँ, मुझे खुद पता नहीं. शायद इसलिये कि मुझे कोई पढ़ नहीं रहा और न ही मेरा पास ऐसे दो लिंक हैं जो मैं दे सकूँ सनसनी मचाने के लिए. शायद परसाई जी ने एक बार कहा था कि मैं आम जन के लिए लिखता हूँ. मैं रिक्शेवालों के लिए लिखती हूँ. फिर तुम त...
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साधवी
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[04 Aug 2008 21:29 PM]



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