सबसे सुखी गरीब
अमर उजाला के तीर-ए-नजर में प्रकाशित एक व्यंग्य प्रस्तुत है... महंगाई जब आती है, अमीरों के सिर चढ़ जाती है, मिडिल क्लास फ़ैमिली को मुँह चिढ़ाती है, परन्तु गरीबी के पेड़ की एक डाल भी हिला नही पाती... वो कल भी तरसते थे रोटी को और रोटी आज भी गरीब को भाव दिख...
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[30 Jul 2008 10:53 AM]



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