क़हक़हे का अर्थ रुदन भी होता है
एक दिन पुरुष ने क़हक़हा लगाया। कहते हैं कि संप्रेषणीयता का नियम होता है कि जो जैसे कहा जाए, वैसे ही सुना जाए और समझा भी जाए। इस मामले में पुरुष की संप्रेषणीयता कमज़ोर थी। वह अपना क़हक़हा ख़ुद नहीं समझ पाता था। उसे लगता था कि उसने क़हक़हा लगाया है, ले...
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[29 Jul 2008 16:20 PM]



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