मानवता मर गई है या मार दी गई है

प्रभाकरगोपालपुरिया कुछ दिन पहले की बात है। एक दिन शाम के समय मैं विले -पार्ले जाने के लिए 422 नंबर का बस पकड़ा। मेरे साथ मेरे एक परिचित भी थे। बस में हम दोनों लोगों को बैठने के लिए सीट मिल गई। जब बस दो-तीन स्टाप आगे गई तो बहुत सारे लोग चढ़ गए और बस ठसाठस भर गई। मैं जि... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभाकर पाण्डेय
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[29 Jul 2008 05:00 AM]

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