कम डर बाघ का अधिक डर टिपटिपवा का : भोजपुरी लोककथा

प्रभाकरगोपालपुरिया एक गाँव के बाहर रामू नामक एक हरिजन ने अपने रहने के लिए एक झोपड़ी डाल रखी थी। वह अपने परिवार का गुजर-बसर करने के लिए प्रतिदिन जंगल में जाता और वहाँ से मरे हुए जानवरों का चमड़ा एकत्रित करके लाता। उन चमड़ों से वह जूता बनाता और बाजार में बेंच आता। यही उ... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभाकर पाण्डेय
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[25 Jul 2008 10:28 AM]

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