छत नहीं थी, छत की ख़ाली जगह बची थी

मातील्दा - तुम्हारी भाषा में गाल को क्या कहते हैं? - गाल को? हम्म्म्... होंठ कहते हैं। - तो फिर आंख को नाक कहते होंगे? - नहीं जी, आंख को तो घर कहते हैं। - अच्छा? - हां जी। आंख में रहा जाता है। सपना बनकर, आंसू बनकर, बादल बनकर... और किरकिरी बनकर। - और घर का दर... [पूरी पोस्ट]
writer शायदा
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[25 Jul 2008 07:12 AM]

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