घिन आने लगी है 'घोड़ामण्डी' से

anubhav लगते थे ... .बहुत अच्छे तुम बातें तुम्हारी ..... सीधे दिल के अंदर नसों में खून ... ..उबलने लगता था कुछ भी करने को आतुर चिलचिलाती धूप में पसीने से लथपथ .. आते थे जब भी .. भटकते हुए मांग कर किसी से 'लिफ्ट' अथवा पैदल ... तुम्हारा भूखा प्यासा पदयात्रा से... [पूरी पोस्ट]
writer शोभा
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[23 Jul 2008 08:16 AM]

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