अंतरात्मा की आवाज़

बाल किशन का ब्लॉग मैंने कहा "एक रोटी और नहीं खा सकूंगा" वे बोलीं "अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनो और खा लो" मैंने कहा "खाना तो पेट की आवाज़ पर निर्भर है" वे बोलीं "लेकिन वहां तो सब अंतरात्मा की आवाज़ सुनकर खा रहे हैं मैंने कहा "उनकी अंतरात्मा पेट में बसती होगी वे बोलीं "का... [पूरी पोस्ट]
writer बाल किशन
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[22 Jul 2008 23:59 PM]

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