किताबों का भविष्य!
कल उन्मुक्त जी की इस चिट्ठी पर बडी दिलचस्प चर्चा पढने को मिली। एक तो वो दिल्ली में उनकी पसंदीदा किताबों की दुकान बुकवार्म बन्द होने से दुःखी थे और दूसरे अन्य किताबों की दुकानों पर सही माहौल ना होने को लेकर भी व्यथित थे। पढने का चलन कम होने के अलावा,ट...
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Nitin Bagla
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[20 Jul 2008 02:53 AM]



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