एक कविता खुशी की हो, एक दुख की…

अनहद नाद पुरबिया फुटानीबाज प्रमोद सिंह की एक कविता एक मामूली कविता की किताब एक कविता खुशी की हो, धुली लहरीली साइकिल पर चढ़कर आए, जंगले के लोहे में धंसे बच्‍चे का चेहरा मुस्‍कराहट में भर जाए. खुरपी, मटकी, संड़सी, असबेस्‍टस, बेलचा, हेलमेट, बाजा, बंसखट पर हो एक... [पूरी पोस्ट]
writer PRIYANKAR
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[17 Jul 2008 03:44 AM]

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