मालूम न था हमको

भीगी गज़ल आई जो कभी दूरी ,कर देगी जुदा हमको वो लौट न पाएँगे मालूम न था हमको रिश्तों की कसौटी पर खुद को ही मिटा आए हम चलते रहे तन्हा, थे साथ नहीं साए अश्कों के सिवा उनसे, कुछ भी न मिला हमको वो लौट न पाएँगे मालूम न था हमको मौला ये बता दे मुझे, मेरा दिल क्यूँ सुल... [पूरी पोस्ट]
writer श्रद्धा जैन
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[14 Jul 2008 10:30 AM]

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