दर्द

भीगी गज़ल क्यूँ चुप चुप सा खड़ा है दर्द आँखों में जब हरा है दर्द हंसते खिलते लोगों से मिल, कुछ तो शायद डरा है दर्द आँख छुपा लेती जज़्बो को मुंडेरों पे मरा है दर्द यादों की इक आग जलाकर कहा है हमने खरा है दर्द तुमने वफ़ा के सफ़र में “श्रद्धा” सुना, लिखा और प... [पूरी पोस्ट]
writer श्रद्धा जैन
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[04 Jul 2008 22:33 PM]

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