शीर्षक नहीं बदलूँगा.....जालिमों
जालिमों तुम कितना भी जुल्म ढा लो पर मैं शीर्षक बदलनेवाला। अजीब हाल है भाई। मैं चिट्ठाकार हूँ, अपनेचिट्ठे में कुछ भी लिखूँ, अनाप-शनाप लिखूँ, मानवता मरे या चिट्ठा, ये देखना मेरा काम नहीं जालिमों।चिट्ठाकार जगत के लिक्खाड़ जालिमों एवं चिट्ठा-पाठकों, मैंन...
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प्रभाकर पाण्डेय
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[23 Jun 2008 19:48 PM]



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