आज उस कबीर का प्रकटोत्सव जो कभी ग़ायब ही नहीं हुआ !
आज कबीरदास जी के प्रकटोत्सव पर शहर में कई कार्यक्रम- मेरे शहर के अख़बारों में ये शीर्षक पढ़कर सुबह-सुबह मन विचलित हो गया.सोचने लगा मैं कि जो शख़्स आज अपने लिखे से प्रति-पल हमारे इर्द-गिर्द मौजूद है उसका प्रकट होना चौंकाता है. इसका मतलब हम कबीर के लिखे क...
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sanjay patel
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[17 Jun 2008 19:59 PM]



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