फ़ादर्स डे....नई पीढ़ी में बीतती पीढ़ी का अक्स देखना बेमानी होगा न ?
उनकी मौजूदगी और आवाज़ से हीधूजनी चल जाती थी.उनका आदेश यानी पत्थर की लकीरउनसे ज़्यादा जानकारी किसी और को हो ही नहीं सकती थी.वे थे एक स्कूलएक संस्था...तहज़ीब,संगीत,भूगोल और न जाने कितनीऔषधियों की.वे नाम के पिता नहीं थेउनके ठसके और रूतबे में झलकता थापिता क...
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sanjay patel
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[14 Jun 2008 19:32 PM]



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