बारिश जो न करवाए, गीत लिखवा लिया!
बारिश जो न चाहे करवा ले!कल वर्षा में सराबोर होकर जब घर पहुंचे तो हल्का-हल्का सुरूर छा चुका था. गली में बैठने वाले बुजुर्ग घड़ीसाज़ रियाज काका से सुबह ही छतरी सुधरवाई थी. रास्ते में हवा-पानी की मार से वह क्षत-विक्षत हो चुकी थी. पैराहन से पानी टपक रहा थ...
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विजयशंकर चतुर्वेदी
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[12 Jun 2008 06:13 AM]



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