बारिश जो न करवाए, गीत लिखवा लिया!

आज़ाद लब बारिश जो न चाहे करवा ले!कल वर्षा में सराबोर होकर जब घर पहुंचे तो हल्का-हल्का सुरूर छा चुका था. गली में बैठने वाले बुजुर्ग घड़ीसाज़ रियाज काका से सुबह ही छतरी सुधरवाई थी. रास्ते में हवा-पानी की मार से वह क्षत-विक्षत हो चुकी थी. पैराहन से पानी टपक रहा थ... [पूरी पोस्ट]
writer विजयशंकर चतुर्वेदी
views
90
upvote
8
downvote
0
rating
8
comments
12
[12 Jun 2008 06:13 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix