वसंत की वीकेंड डायरी

अनामदास का चिट्ठा ऋतुराज वसंत आता है, चला जाता है, हम अपनी धुन में चले जाते हैं. थोड़ा रुकें तो पता चले, कौन आया, कौन गया. न अपने क़स्बे में, न दिल्ली में पता चला कि वसंत क्या होता है. लंदन में मेरे लिए दस साल से वसंत आता है, ठंड से सिहरे मन की कोंपले खिलती हैं लेक... [पूरी पोस्ट]
writer अनामदास
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[09 Jun 2008 18:31 PM]

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