बस्तर भारत का हिस्सा नहीं है?

सफर - राजीव रंजन प्रसाद क्रांति की एक चौराहे पर पुंगी बज रही थी “बोल मजूरे हल्ला बोल-हल्ला बोल, हल्ला बोल”। सूत्रधार चीख रहा था – दिल्ली बिजली से चमचमाती है और इधर बस्तर में जानवरों की तरह जीने के लिये विवश हैं लोग। सडक नहीं है, पीने का पानी हर गाँव नहीं पहुँचा, स्कूल नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव रंजन प्रसाद
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[08 Jun 2008 22:41 PM]

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