'बकरी जो मैं-मैं करती है....'

आज़ाद लब 'मौर्यध्वज और ताम्रध्वज' नाटक हमारे यहाँ रामलीला का राज्याभिषेक समाप्त होने के बाद देसी मंडलियाँ खेला करती थीं. अब तो टीवी ने रामलीला मंडलियों को लील लिया है. बचपन में सतना जिले के दुरेहा कस्बे की रामलीला मंडली बड़ी नामाजादिक थी. उसका साजो-सामान और क... [पूरी पोस्ट]
writer विजयशंकर चतुर्वेदी
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[07 Jun 2008 00:35 AM]

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