हवा चूमती है फूल को

अ आ अन्योन्याश्रित हवा चूमती है फूल को और फिर नहीं रह जाती है वही हवा कि उसके हर झोंके पर फूल ने लगा दी है अपनी मुहर और फूल भी कहां रह गया है वही फूल कि उसकी एक-एक पंखुड़ी पर हवा ने लिख दी है सिहरन फूल के होने से महक उठी है हवा हवा के होने से दूर-दूर तक... [पूरी पोस्ट]
writer Arun Aditya
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[04 Jun 2008 18:44 PM]

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