पढ़िये लीलाधर जगूड़ी की 'पुरुषोत्तम की जनानी'
हमारे समय के बहुत बड़े कवि लीलाधर जगूड़ी की यह कविता मैं चाहता हूँ कि ब्लॉगर साथी पढ़ें. 'पहल' के हालिया अंक में छपी यह कविता आजकल चर्चा में है. जगूड़ी जी से इस कविता को लेकर फोन पर मेरी बात हुई. उन्होंने कहा- "पेड़ तटस्थ समाज का प्रतीक न समझा जाए बल्क...
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विजयशंकर चतुर्वेदी
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[03 Jun 2008 08:44 AM]



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