नक्सलवादी या उनके समर्थक - सुकारू के हत्यारे कौन? (बस्तर का हूँ इस लिए चुप रहूँ - संस्मरण, कडी-2)

सफर - राजीव रंजन प्रसाद तब एसी मनहूसियत हवाओं में नहीं थी। उससे मैं पहली बार पुरानी बचेली के बाजार में मिला था जहाँ मुर्गे लडाये जाते थे। बडा जबरदस्त माहौल हुआ करता था। उसने लाल अकडदार मुर्गे पर दाँव लगाया हुआ था, कम्बख्त मुर्गा केवल देखने का ही मोटा था। सामने वाला मुर्गा... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव रंजन प्रसाद
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[02 Jun 2008 23:13 PM]

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