तुमको क्या मालुम.
दुश्मन तो खुले-आम करते है दुश्मनी की बातेंदोस्त मगर कब क्या कर गुजरे तुमको क्या मालूम.अगर पोंछने वाला कोई हो साथी तोआंसुओं का मज़ा क्या है तुमको क्या मालूम.अरे नादान सूरज चाँद सितारों की बातें करता हैआसमान मे कब बादल छा जाय तुमको क्या मालूम.गैरों पे क...
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बाल किशन
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[29 May 2008 16:00 PM]



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