हरी है छाया तुम्हारी
हरित पातों से तुम ,यूँ घेर रखा है तुमने ,मेरे सारे पल , सारे क्षण ,छाल तुम्हारी ,छाया में तुम ,इतने हरे ,इतने शीतल ,पग तले इतने मखमल ...कि पीली उजास ,जले है मुझसे ,नीली शाम ,छुप गई आकर आँखों में ...माटी के पैरों में ,तुमने रत्न उढ़ेल दिए हैं ,देखो, सा...
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swati
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[27 May 2008 01:09 AM]



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