बस्तर का हूँ इस लिये चुप रहूँ - साभार मोहल्ला।
संस्मरण (कडी-1) जगदलपुर का सीरासार चौक, शाम के करीब सात बजे होंगे। अचानक एक जनसैलाब उमडा और चौंक से उस बेहद संकरी सडक में जैसे उमडता हुआ पुलिस थाने की ओर बढने लगा। मैं कुछ समझ पाता इससे पहले बचने की कोशिश जरूरी थी। मैं अपने मित्र अफज़ल के घर की ओर भाग...
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राजीव रंजन प्रसाद
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[26 May 2008 03:20 AM]



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