कवि का कलपना

काकेश की कतरनें. केडीके महोदय बालकिशन जी की इस पोस्ट पर अपना कुदरती कवितायी हुनर दिखाना चाहते थे लेकिन सफल नहीं हुए तो हमको बोले कि इस “कवि की कल्पना” को किसी तरह ठेल दो. हमको भला क्या तकलीफ.हम ठेल रहे... [पूरी पोस्ट]
writer काकेश
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[25 May 2008 10:43 AM]

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