प्रमोद और प्रत्यक्षा उर्फ साधु वचन का मर्म

विनय पत्रिका वो एक बात बहुत नागवार गुजरी है.....जिसका फसाने में कोई जिक्र नहीं था....मेरी कुछ बातों के जरिए प्रमोद जी और प्रतयक्षा जी को अपनी हीनता उजागर करने का मौका मिला है और दोनो बुद्धिजीवी मित्र निकाल भी रहे... [पूरी पोस्ट]
writer बोधिसत्व
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[24 May 2008 09:43 AM]

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