चपे रहो प्रहरी प्रमोद जी
मैं लिखना नहीं चाहता था लेकिन लिख रहा हूँअजदकेश प्रमोद जी करुणा के अवतार हो गए है....अवधर दानी हो गए हैं.....मुंबई में रहते हैं सिनेमा टीवी के लिए लिखते भी हैं.....और न लिख पाने पर छटपटाते भी...
[पूरी पोस्ट]
बोधिसत्व
263
5
0
5
4
[23 May 2008 07:11 AM]



Shuffle








