क़िस्सा खिलौना टूटने से पहले का

काकेश की कतरनें. अब वो चाहते तो नयी न सही, सेकेंड-हैंड कार आसानी से ख़रीद सकते थे। जितनी रक़म में आज कल चार टायर आते हैं, इससे कम में उस जमाने में कार मिल जाती थी, लेकिन कार में उन्हें वह रईसाना ठाट और जमींदाराना ठस्सा... [पूरी पोस्ट]
writer काकेश
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[10 May 2008 19:27 PM]

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