न ही वेरेन वेरानि संमंतिध कुदाचन

मैत्री न ही वेरेन वेरानि संमंतिध कुदाचन।अवेरेन ही संमंतिध ऐस धम्मो संनंतनो।।(वैर से वैर को शांत नहीं किया जा सकता। अवैर या प्रेम ही इसका समाधान अच्छी तरह से कर सकता है और यही सनातन धर्म है। - धम्मपद)गांधी... [पूरी पोस्ट]
writer अतुल
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[23 Apr 2008 10:45 AM]

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