पतझड़
किताब पुरानी थी। कबाड़ में देते देते वापस उठा ली थी। ना जाने क्या सोचकर पन्ने पलट दिये। किताब में से कई सारे सूखे पत्ते नीचे उतर आये। मुड़े, सूखे छोटे बड़े..। नज़र बाहर गई थी। फिर पतझड़ था। था। हर...
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Beji
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[20 Apr 2008 11:29 AM]



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