भोजपुरी लोककथा : चालीस में चार कम हजाम, पंडीजी सलाम

प्रभाकरगोपालपुरिया आपलोग तो जानते ही हैं कि हजामलोग कितने छत्तीसा (चालीस में चार कम) होते हैं। शादी-विवाह, यज्ञ-प्रयोजन आदि में हजाम या हजामिन हमेशा पंडितों को दबा के रखते हैं। बिना हजाम या हजामिन के इन धार्मिक या... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभाकर पाण्डेय
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[19 Apr 2008 00:42 AM]

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