अविनाश ! आपको आईना दिखा रहा हूँ, हो सके तो शर्म करना

सुनो भाई साधो........... अभी तक तो लोगों ने समझा था कि अविनाश कुछ हद तक महत्वाकांक्षी हैं लेकिन अब तो लग रहा है कि उन्होने उस सीमा-रेखा को भी लांघ दिया है जहाँ से इंसान का पतन शुरू हो जाता है. पहले-पहल आप ही सभी लोगों को... [पूरी पोस्ट]
writer कमलेश मदान
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[17 Apr 2008 10:56 AM]

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