अविनाश बाबू ! ये तो होना ही था

सुनो भाई साधो........... आज जनसत्ता के कार्यकारी संपादक श्री ओम थानवी का जो पत्र आपने सार्वजनिक किया है आपकी व्याकुलता और हताशा उससे जाहिर हो रही है ! जाहिर है साफ़ तौर पर हर जगह आपकी मठाधीशी और आपका मॉडरेशन तो चलने से रहा!... [पूरी पोस्ट]
writer कमलेश मदान
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[16 Apr 2008 07:39 AM]

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