दोस्तों के बारे में
कौन समझ सका हैदोस्तों कोसिवाय दोस्तों केआवारा छोकरों का एक झुण्डजो बेझिझक घुस जाता हैघरों मेंजैसे हवा के साथघर में भरा जाते हैंपीले पत्तेकोई वक्त नहीं हैउनके आने कासुबह, दोपहर, शाम या रातकभी भी धमक जाते हैंबिना दरवाज़ा खटखटायेबहुत जल्दी में हुएतो सड़क पर...
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मणिमोहन
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[18 Jun 2010 05:10 AM]



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