ऐसे नचनियाये, पिल्लाये समय में..
कुत्ते भौंकते रहते हैं. मैं सोचता रहता हूं. और इसी में ‘रावण’ रिलीज़ भी हो जाती है. पोस्टर पहले रिलीज़ हुई थी, तब कुत्ते शांत थे, मगर मैं तब भी सन्न हुआ था कि कागज़ पर ये लाल, पीले, नीले की अलग-अलग शोभा तो ठीक है, मगर जिस चेहरे के आसरे ये रंग मुखरित,...
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Pramod Singh
ब्लॉगिंग
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[18 Jun 2010 04:37 AM]



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