आज मेरी शादी की सालगिरह है ...बधाइयां स्वीकार की जायेंगी!

टूटी हुई बिखरी हुई फरजाना और मेरा वैवाहिक साथ आज पन्द्रहवें साल में दाखिल हो रहा है। धूप छाँव के खेल में जितना मैं पिसता हूँ उससे कहीं ज्यादा वो... ये तो आप भी जानते/ती हैं । आप की बधाइयां एक बार फिर हमें इस बुरे दौर में डट कर खड़े रहने की हिम्मत देंगी ...... [पूरी पोस्ट]
writer इरफ़ान
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[18 Jun 2010 04:40 AM]

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